क्या कभी आपने सुना है कि भोजन से हो सकता है कैंसर... जानिए कुछ खास वजह


शीर्षक देखकर चौंकिए नहीं। ‘‘अति से क्षति’ वाली कहावत भोजन पर भी लागू होती है। शोधकर्ता बता रहे हैं कि आवश्यक्ता से अधिक भोजन कैंसर के प्रति शरीर की प्रतिरोधी क्षमता कम कर देता है। वैज्ञानिकों के अब तक के शोध में अमेरिका में कैंसर की ऊंची दर का कारण अधिक समृद्ध भोजन है। 

एक अध्ययन ऐसे जापानियों पर किया गया है जिन्होंने खान-पान पश्चिमी तौर तरीके अपना लिए हैं। अध्ययन से पता चला है कि इन जापानियों में कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं, पश्चिमी देशों में खान-पान के दुष्परिणाम हैं मल संस्थान, स्तन और पौरूष ग्रस्थि के कैंसर।

‘‘अमेरिकी हैल्थ फाउंडेशन के अध्यक्ष अनेस्ट वाइन्डर के अनुसार मुंह और भोजन नालिका के कैंसर का शराब से, स्तन कैंसर का वसा से, बड़ी आंत के कैंसर का अम्लता से सीधा संबंध है। एक अन्य जाने-मानें कैंसर विशेषज्ञ डॉ. डेविस वार्किट के अनुसार कैंसर के एक तिहाई मामले खान-पान में हेरफेर करने और एक तिहाई मामले धुम्रपान छोड़ने से कम किए जा सकते हैं।

डॉ. बार्किट के कथन का महत्व भारत के लिए भी है। यहां धुम्रपान तो किया ही जाता है। तम्बाकू खाने का भी खूब रिवाज है। मुंह का कैंसर विश्व में सबसे अधिक भारत में ही होता है। जिसमें पान, तम्बाकू चबाने की लत का बड़ा योगदान है। बंबई के टाटा मेडिकल अस्पताल में हुए शोधकार्य के अनुसार पान में तम्बाकू हो या न हो, उसके अत्याधिक सेवन से मुंह और भोजन नलिका का कैंसर होने की संभावना होती है।

एल्कोहल में तम्बाकू के घोल का रासायनिक विश्लेषण करने पर उसमें नाइट्रोसोनोर निकोटिन और नाइट्रोसोएमीन वर्ग के रसायन पाए गए हैं। ये रसायन तीव्र कैंसरकारक है। तम्बाकू खाने के अीयस्त व्यक्तियों की लार में भी नाइट्रोसोएमीन रसायनों की उपस्थिति देखी गई है। उनकी लार में नाइट्रइड की मात्रा भी सामान्य स्तर से लगभग दुगुनी थी।

विश्लेषण में पाया गया कि कैंसर कारक यासोसाइनेट रयायन का स्तर नियमित धुम्रपान करेन वाले व्यक्ति की लार में सामान्य से कहीं अधिक होती है। सिगरेट की तुलना में बीड़ी अधिक कैंसर उत्प्रेेरक है यह परिणाम आम धारणा के विपरीत है।

जिस तरह कुछ खाद्य पदाथ्र कैंसर पैदा कर सते हैं उसी तरह कुछ खाद्य पदाथ्र कैसर के प्रति शरीर की प्रतिरोध शक्ति बढ़ाते हैं। इसमें प्रमुख है- विटामिन ए का पूर्णरूपेण बीटाकैरोटीन। यह पीले फलों और सब्जियों में बहुत ज्यादा मात्रा में मिलता है।

कैलिर्फोनिया विश्वविद्यालय के कैंसर विशेषज्ञ ब्रैस एमीज मानते हैं कि विटामिन ई और सी भी कैंसर के विरूद्ध रक्षात्मक भूमिका अदा करते हैं। उनकी यह भी मान्यता है कि वसा के अणु शरीर में जाकर टूटने लगते हैं। इस क्रिया के दौरान अम्ल पैदा होते हैं तथा ऐसे पदार्थों का उत्पादन होने लगता है जो कैंसर की उत्पत्ति को उकसाते हैं।

हरे और पीले रंग की सब्जियों में विटोकेरोटिन के साथ-साथ ऐसे कई खनिज तत्व भी होते हैं जिनकी शरीर को अत्यंत सूक्ष्म मात्रा में आवश्यक्ता होती है। शरीर की कैंसर प्रतिरोधी क्षमता बढ़ाने में इनकी अपनी भूमिका है। #

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