ध्रूमपान या तंबाकू की लत से कैसे छुटकारा पाएं?


तम्बाकू का उपयोग हृदय रोग, कैंसर और पुरानी फेफड़ों की बीमारी सहित कई प्रतिकूल स्वास्थ्य परिणामों, विकलांगता और मृत्यु से जुड़ा हुआ होता है। तम्बाकू के धुएं में ऐसे रसायनों की पहचान की गई है, जिनसे मनुष्यों और जानवरों में कैंसर हो सकते हैं। ध्रूमपान की लत धीरे-धीरे हमारे शरीर को अंदर से खोखला करती रहती है और वही आगे चलकर दर्दनाक मौत का कारण बनती है। हालांकि, किसी भी लत को दूर किया जा सकता है, यदि हम खुद से यह वादा कर लें कि ध्रूमपान या तंबाकू हमारे शरीर के लिए अहितकर है और इसके सेवन से हमें भारी दर्दनाक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। तो ऐसे मे हम खुद को ध्रूमपान के खिलाफ खड़ा कर पाएंगे। जो कि हमारे स्वास्थ व जीवन के लिए करना बहुत जरुरी है।

आज के परिवेश में ध्रूमपान या तंबाकू की लत पड़ना बहुत ही स्वाभाविक व सामान्य घटना है। आमतौर पर युवा वर्ग शौक वश इस नशे की दुनिया में प्रवेश कर जाते हैं। फिर यह उनके दिनचर्या का हिस्सा बन जाता है और उन्हें पता भी नही चलता है। हाँ, कुछ लोग ऐसे भी है जो अत्यधिक तनाव के कारण, या फिर अपने चारों ओर की प्रतिस्पर्धी दुनिया से लड़ते-लड़ते हार मानकर या फिर किसी अन्य कारण वश नशे की ओर अपने कदम बढ़ा लेते हैं। लेकिन वह यह बात नहीं समझने की बिल्कुल भी कोशिश नहीं करते की नशा किसी भी समस्या का कोई समाधान या विकल्प तो बिल्कुल भी नहीं हो सकता है। पर दुर्भाग्यवश वह अपनी नशे की लत को अपने जीवन का हिस्सा मानने लगते हैं और अपने इस अमूल्य जीवन का उपहास धुएं की तरह उड़ाते रहते हैं।अंततः काल के गर्त में जाकर उनके कदम रुकते हैं जो कि बड़ा ही दुखदायी होता है। 

तंबाकू जिसमें निकोटीन पाया जाता है जिसके परिणामस्वरूप इसकी लत लग जाती है। हालांकि यह बहुत ही कम है जो स्थायी रूप से धूम्रपान बंद कर देते हैं। दुख की बात है कि एक शौक के रूप में शुरू होने वाली यह आदत एक उम्र से अपनी जड़ें फैलाती है जब ज्यादातर लोग बस अपने सपनों, महत्वाकांक्षाओं और करियर को आकार देना शुरू करते हैं। यह शौक अंत में जाकर शोक का कारण भी बनता है।  (1) पर्यावरणीय कारकों में तंबाकू उत्पादों की आसान पहुंच और उपलब्धता, सिगरेट के विज्ञापन और किंवदंतियों और सितारों द्वारा प्रचार और इसकी कम कीमत के कारण तंबाकू की व्यापक वहन क्षमता शामिल है। (2) व्यक्तिगत कारकों में संगी-साथियों जैसी धारणाएं भी शामिल हैं जिनके कारण तंबाकू का सेवन करना सामान्य बात है। सिगरेट्स से निकलने वाला धुआँ मानव शरीर को नुकसान पहुँचाता है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि सिगरेट शायद एकमात्र ऐसा विज्ञापित उत्पाद है जिसके उपभोग के कारण कैंसर होता है। नशीली निकोटीन की जो नशीली दवा है उसकी खुराक अपरिवर्तित रहती है। 

कई अध्ययन इस बात की पुष्टि करते हैं कि फेफड़ों के कैंसर की संभावना कम टार या लो-निकोटीन धूम्रपान करने वालों में किसी भी तरह से कम नहीं है। छोटी मात्रा में निकोटीन मस्तिष्क और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र पर हमला करता है जो धूम्रपान करने वालों की मनोदशा को प्रभावित करता है और धूम्रपान करने की उनकी प्रकृति को बढ़ाता है। इस प्रकार एक व्यक्ति जब तंबाकू से छुटकारा पाने की कोशिश करता है तो उसे बेचैनी महसूस होती है और वह तड़पने लगता है। यानि कि उसके लिए तंबाकू से छुटकारा पाना एक जीवन संघर्ष बन जाता है।

तंबाकू से छुटकारा पाने के लिए सबसे पहले, आपको अपने जीवन की उन महत्वपूर्ण बातों पर ध्यान देना होगा जिसकी वजह से आपने तंबाकू से छुटकारा पाने का निर्णय लिया है। आपको उन महत्वपूर्ण बातों के प्रति संवेदनशील होना चाहिए क्योंकि यह लंबे समय तक आपके जीवन को बदलने की क्षमता रखता है। तंबाकू से छुटकारा पाने का निर्णय आपका होना चाहिए किसी के कहने पर या किसी प्रिय की खुशी के लिए करने पर काफी संभव है कि आप कुछ दिनों बाद अपना संघर्ष जारी न रख बाएं और एक बार से फिर तंबाकू का सेवन करने लग जाए। तो कुल मिलाकार नशे की लत से छुटकारा पाने का ठोस निर्णय आपको खुद ही करना चाहिए। तभी जाकर एक बेहतर व साकररात्मक जीवन का निर्माण कर पाएंगे।

एक और बहुत ही महत्वपूर्ण मुद्दा है जो धूम्रपान करने वालों को बड़े पैमाने पर सोचना चाहिए। उन्हें यह सोचना चाहिए कि आखिर उन्होंने धूम्रपान क्यों शुरू किया था और धूम्रपान को आगे क्यों जारी रख रहे हैं। जबकि वे अच्छी तरह से जानते हैं कि धूम्रपान एक बुरी आदत है और  यह उनके स्वास्थ के लिए हानिकारक है। यदि आपने तंबाकू से छुटकारा पाने का मन बना लिया, तो भी इतने लंबे समय तक निकोटीन आपको इतनी आसानी से कभी नहीं छोड़ेगा, क्योंकि निकोटीन पूरे शरीर की प्रणाली को परेशान करने वाले केंद्रीय तंत्रिका तंत्र पर अपना असर फैला चुका होता है। आप मनोवैज्ञानिक प्रभाव से गुजरेंगे और फिर से वापस आने के लिए बेचैन हो जाएंगे। यदि आप धूम्रपान छोड़ने के तुरंत बाद एक डॉक्टर या एक परामर्शदाता के पास जाते हैं, तो वह न केवल आपकी मदद करेगा, बल्कि भविष्य के कार्यों के लिए मार्गदर्शन भी करेगा और यदि आवश्यक हो, तो सही दवा भी लागू कर सकता है। 

यदि आप सिगरेट की दुकान पर  या फिर किसी नुक्कडड़ पर किसी को अन्य को सिगरेट  पीते देखते हुए बिना किसी लालच के कुछ घंटे बिता सकते हैं, तो समझे आपने आधा खेल जीत लिया है। अब आप अपने किसी साथी के साथ कुछ समय गुजारने के लिए धूम्रपान रहित रेस्तरां में जाना पसंद कर सकते हैं। शाम होते ही आप बिना सिगरेट खरीदे वापस घर चले जाते हैं और अपनी बेचैन मानसिकता पर नियंत्रण रखने की कोशिश करते हैं, बल्कि बिस्तर पर कूद जाते हैं। कृपया बालकनी में घूमने से बचने की कोशिश करें, जहां कल भी आप एक सिगरेट के साथ गए थे।

यह अकसर देखा गया है कि धूम्रपान करने वालों को लौ से बेहतर धुआं देखना पसंद है। "वे पूरी तरह से अंधेरे कमरे के अंदर धूम्रपान नहीं करेंगे क्योंकि वे बस धुएं के छल्ले देखना चाहते हैं।" आपको यह तय करने की ज़रूरत है कि आपको क्या पसंद है, लौ या धुँआ। यदि सिगरेट जलती है, तो आप केवल धुएं के छल्ले देख सकते हैं, लेकिन अगर आपके भीतर की दुनिया में जो सृजनात्मकता की आग जलती है, उसके छल्ले को हर कोई दिखाना ही आपके जीवन का मकसद है न कि कुछ और, जब यह ऊर्जा बाहर आएगी और दुनिया आपको सलाम करेगी। जल्दी उठे और सुबह को अपने जीवन में ताजा हवा आने दें, और आप सुबह की धूप के साथ अपना नए जीवन को नया  आयाम दें। #

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