क्या आप रेकी चिकित्सा के बारे में जानते हैं? वैज्ञानिक भी हैं जानकर हैरान...



रेकी ब्रह्मांड में उपलब्ध चैतन्य शक्ति की तरंगों को शरीर में सुव्यवस्थित ढंग से प्रवाहित करने की सरल प्रक्रिया है जिसके द्वारा स्वास्थ्य, प्राप्त किया जा सकता है। रेकी एक जापानी शब्द है जिसका मतलब है, यूनिवर्सल लाइफ फोर्स अर्थात् ब्रह्मांड की प्राण ऊर्जा। हमारा ब्रह्मांड अनन्त ऊर्जा से परिपूर्ण है। इस प्राण ऊर्जा को चीन में ‘ची’ इंग्लैण्ड में लाईट अथवा होली स्प्रिट, रूस में बायोप्लास्मिक तथा भारत में प्राण ऊर्जा के नाम से परचाना जाता है। प्रतयेक व्यक्ति इस ऊर्जा (रेकी) के साथ ही जन्म लेता है, बड़ा होता है और इसकी के साथ मरता है अर्थत रेकी जीवन का सार है। माता-पिता एवं गुरूजनों द्वारा आशीर्वाद के रूप में इस ऊर्जा को हस्तांतरित करने का आज भी प्रचलन है। 

स्वामी रामकृष्ण परमहंस द्वारा स्वामी विवेकानंद में प्राण ऊर्जा का शक्तिपात कैसे किया?
सिर दर्द के समय सिर पर और आंखे भारी होने पर आंखों पर हथेली का स्पर्श करने से क्यों राहत का अनुभव होता है? रामायण में वर्णित लक्ष्मण रेखा क्या थी? उसके अंदर का क्षेत्र इतना प्रभावशाली एवं सुरक्षित कैसे बन गया जिससे रावण जैसा पराक्रमी भी उस क्षेत्र में प्रवेश करने का साहस नहीं कर सका? कौन सी शक्ति द्वारा श्री राम ने अहिल्या में प्राणों का संचार किया? स्वामी रामकृष्ण परमहंस द्वारा स्वामी विवेकानंद में प्राण ऊर्जा का शक्तिपात कैसे किया? जैन साधुओं द्वारा मांगलिक श्रवण का आज भी प्रचलन है। सांप और बिच्छू का विष उतारने तथा भूत-प्रेत का प्रभाव हटाने के लिए जो प्रक्रिया अपनाई जाती है वह रेकी का ही रूप है। आज भी फिलीपाइन्स देश में डिवायन हीलींग द्वारा बिना किसी औजार अथवा उपकरणों के शल्य चिकित्सा करने के पीछे कौन सी अदृश्य शक्ति कार्य करती है, यह शक्ति रेकी ही है।

‘ऐसी कौन सी शक्ति थी जिससे जब जीसेस क्राइस्ट आशीर्वाद देते थे तो कष्ट दूर हो जाता था।
इस प्रभावशाली प्राण ऊर्जा के बारे में पुनः व्यवस्थित ज्ञान उपलब्ध कराने में जापान के मिकाउसइ की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। मिकाउसइ जापान के एक चर्च में पादरी के रूप में कार्य करते थे। एक दिन किसी जिज्ञासु ने उनसे पूछा ‘ऐसी कौन सी शक्ति है जिसके कारण जीसेस क्राइस्ट जब किसी दुःखी  को आशीर्वाद देते थे तो उसका कष्ट दूर हो जाता।’ मिकाउसइ द्वारा इस प्रश्न का संतोषजनक समाधान न कर पाने के कारण उन्होंने उस पद पर रहना उचित नही समझा और इस प्रश्न का समाधान ढंढने निकल पड़े।

डॉ. मिकाउसइ ने हथेली से अपने अंगूठे को दबाया तो थोड़ी देर देर में अंगूठे का दर्द समाप्त हो गया
मिकाउसइ ने अमेरिका, भारत, तिब्बत में विशेष रूप से अनुसंधान करने के बाद अंत में पुनः जापान आकर शांत एकांत पहाड़ी पर 29 दिन तक ध्यान करने के बाद उन्होंने ऐसा अनुभव किया कि कोई अदृश्य चैतन्य शक्ति उनमें प्रवाहित हो रही है। साधना समाप्त कर पहाड़ी से नीचे उतरते समय उनके पैर के अंगूठे में चोट लग गई परन्तु जब उन्होंने हथेली से अपने अंगूठे को दबाया तो थोड़ी देर देर में अंगूठे का दर्द समाप्त हो गया। यहीं से रेकी का पुनः प्रादुर्भाव हुआ। इसके पश्चात उन्होनें इस ऊर्जा द्वारा हजारों भिखारियों को शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ बना सुखी जीवन जीने का मार्ग प्रशस्त किया। 

आज संसार में हजारों रेकी प्रशिक्षक एवं अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएं हैं
डॉ. मिकाउसइ के साथ कार्य करने वाले डॉ. चिचिरों हयाश्ज्ञी ने इस कार्य को आगे बढ़ाया। वर्ष 1649 में चिचिरो हयाशी की मृत्यु के प्श्चात हवायो तकता ने इस विद्या को आगे बढ़ाया और सैंकड़ों लोगों को रेकी का प्रशिक्षण दिया। आज संसार में हजारों रेकी प्रशिक्षक एवं अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएं इसके प्रचार में संलग्न हैं।

रेकी का प्रभाव शारीरिक, मानसिक तथा आत्मिक आदि सभी स्तरों पर पड़ता है।
जब कोई रेकी प्रवाहक रोगी के रोग ग्रस्त भाग पर अपनी हथेली रखता है तो रेकी हथेली के मार्ग से रोगी के शरीर में प्रवाहित होने लगती है। रेकी का प्रभाव शारीरिक, मानसिक तथा आत्मिक आदि सभी स्तरों पर पड़ता है। इसकी कार्य प्रणाली बिल्कुल स्वतंत्र है। हम इस शक्ति का न तो दुरूपयोग ही कर सकते हैं और न ही इस पर जोर जबरदस्ती कर सकते हैं। 

रेकी बिजली के तारों की भांति काम करती है
रेकी पूर्णतः वैज्ञानिक है। किसी प्रकार के अंधविश्वास का यहां स्थान नहीं। रेकी वाहक हथेली द्वारा ऊर्जा भेजता है परन्तु हस्त स्पर्श ही सब कुछ नहीं रेकी वाहक तो केवल उपचार का माध्यम है। उपचार स्वीकार करना अथवा न करना रोगी पर निर्भर करता है। रेकी बिजली के तारों की भांति काम करती है। यदि 15 वॉट का बल्ब होगा तो तनिक भी बिजली का उपयोग नहीं करेगा।

रेकी द्वारा व्यक्ति की अनुपस्थिति में भी उसका उपचार किया जा सकता है
रेकी मनुष्यों के अतिरिक्त वनस्पति एवं सारे प्राणी मात्र के लिए भी लाभप्रद है। आज के युग में रेकी को अनुभवी रेकी प्रवाहक ब्रह्मांड में कहीं भी हस्तांतरित कर सकते हैं। रेकी द्वारा व्यक्ति की अनुपस्थिति में भी उपचार तथा उसकी समस्याओं का समाधान उतना ही प्रभावशाली ढंग से किया जा सकता है जितना उसकी उपस्थिति में। टीवी, रेडि़यो, टेलीफोन, फैक्स आदि की तरंगो के प्रभाव से हम भलीभांति परिचित है। उसी प्रकार रेकी का उपयोग दूरस्थ समस्याओं के लिए समान रूप से किया जा सकता है। 

जापान में रेकी सर्वाधिक लोकप्रिय है
किन्तु रेकी की भी अपनी एक सीमायें हैं। रेकी जन्म से प्राप्त दोषों को दूर नहीं कर सकती है। किसी के शरीर में कोई अवयव न हो, अथवा शल्य चिकित्सा द्वारा निकाल दिया गया हो तो फिर से निर्माण नहीं कर सकती। रेकी मृत्यु को नहीं टाल सकती, किन्तु असाध्य रोगों में पीड़ा से राहत पहुंचाकर शांति से मृत्यु को पाने में सहायता कर सकती है। आज दुनिया भर मे हजारों रेकी प्रशिक्षक रेकी प्रवाहक बनने का प्रशिक्षण देते हैं। रेकी प्रशिक्षण हेतु जापान, अमेरिका, इंग्लैण्ड, भारत आदि विभिन्न राष्ट्रों में राष्ट्रीय एवं अंर्राष्ट्रीय स्तर की संस्थाएं कार्यरत हैं। जापान में रेकी सर्वाधिक लोकप्रिय है। विश्व में अपनी अलग पहचान बनाए हुए है। #

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