आखिर आपके बच्चे अपना पाठ कैसे याद करें? जानिए कुछ आसान टिप्स...


सर्दियां आते ही बच्चों की पढ़ाई जोरों पर होने लगती है क्योंकि परीक्षा के दिन निकट आते दिखाई देते हैं। अक्सर बच्चे पढ़ाई को लेकर काफी परेशान हो जाते हैं और शिकायत करतें हैं कि पूरी कोशिश करने के बाद भी पाठ उनकों याद नहीं होता।

यहां पर हम याद करनें के कुछ सरल उपाय बता रहें है :

रूचि की वृद्धि

याद रखने के लिए सबसे जरूरी बात है पढ़ने वाले विषय में रूचि होना। देखा जाता है कि बालक को जिस विषय में रूचि होती है वह उसी विषय को अधिक पढ़ता है अतः स्वभाविक ही है वह विषय उसे भली भांति याद हो जाता है। इसलिए किसी भी विषय को याद रखने के लिए रूचि की बहुत आवश्यकता है। जैसे-जैसे रूचि बढ़ती जाती है, वह विषय भी अधिक अच्छी तरह याद होता जाता है। इसलिए बच्चों कोे अपने पढ़ाई के विषयों में रूचि बढ़ानी चाहिए।

चिंतन करना

चिंतन का अर्थ है विचार करना अथवा सोचना। वास्तव में रूचि और चिंतन में घनिष्ठ संबंध है। जिस विषय में हमारी रूचि होती है, हम उसी पर चिंतन करते हैं। दूसरे शब्दों में जिस पर चिंतन करते है उसी में हमारी रूचि उत्पन हो जाती है। इस प्रकार रूचि व चिंतन की सहायता से विषय को भली प्रकार याद रखा जा सकता है। इसलिए पढ़ाई के बारे में लगातार सोचते रहना चाहिए।

दोहराने की क्रिया

याद करने के लिए दोहराने की क्रिया भी अतिआवश्क है। जो विषय जितनी अधिक बार दोहराया जाता है उसका प्रभाव मास्तिष्क पर उतना ही अच्छा पड़ जाता है तथा समय पड़ने पर विषय आसानी से याद हो जाता है। दुहराने का अर्थ है समझ-समझ कर बार-बार पढ़ना। जिस पाठ को अर्थ सहित पढ़ा जाता है वह जल्दी या हो जाता है। एक बात और कि दुहराने की क्रिया एक ही बार में पूरी नहीं करनी चाहिए। पहले कुछ घंटे बाद दुहराने से, फिर प्रतिदिन एक बार दोहराने से और बाद में सप्ताह में एक बार दोहराने से पाठ पक्का याद हो जाता है। 

मानसिक प्रयत्न

किसी भी पाठ को याद कर पुुस्तक बंद करके उसे मन ही मन दोहराना चाहिए। यदि इस तरह पूरा पाठ दुहरा लिया जाए तब तो ठीक है अन्यथा फिर से पाठ याद करना पड़ेगा। 

समय विभाजित करना

यदि एक ही विषय लगातार पढ़ते रहा जाए तो दिमाग थक जाता है अतः इस थकान से बचने के लिए मस्तिष्क को आराम भी देना चाहिए। मास्तिष्क को आराम देने का मतलब है बदल-बदल कर विषय पढ़ना और समय विभाजित कर पढ़ना। मान लीजिए एक कविता याद करनी है तो एक ही दिन में बीस बार रटने की अपेक्षा अच्छा है कि उसे समय बांट कर याद किया जाए। पांच दिन में चार-चार बार याद करना भी अच्छा है पर यदि दस दिन में प्रतिदिन दो-दो बार याद किया जाए तो परिणाम अधिक संतोषजनक होगा।

इस प्रकार इन नियमों को ध्यान में रखते हुए किसी भी बड़े से बड़े पाठ व कविता को आसानी से अधिक समय तक याद किया जा सकता है। साथ ही यह भी ध्यान में रखना चाहिए कि पाठ खंड विधि से नहीं बल्कि समग्र विधि द्वारा याद किया जाए उसे समझ बूझ कर ही याद किया जाए। फिर जो भी पढ़ा या याद किया जाए उसे समझ बूझ कर ही तोते के समान रट कर नहीं। यदि इन सब बातों का ध्यान रखा जाए तो जाड़े के मौसम में परीक्षा ज्वर होने का प्रश्न ही नहीं उठता है। #

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