जल है तो कल है, कैसे बचाए पानी का दरुपयोग होने से...


पानी, पानी हर जगह पानी दिखाई देता है और पर जब बात पीने की पानी की आती है तो कोई एक बूंद नहीं मिलता। फिर कहीं जाकर हमें एहसास होता है कि पानी की क्हुया महत्ता है। पानी तो दुनिया में सदियों से है और हमारी महासागरों से घिरी पड़ी है ऐसें में पानी के बारे में क्या सोचना जितना मन उतना इस्तेमाल करिए। शायद यही सोच हमारी मन में बन गई है और पानी को लेकर न तो गंभीर है और न ही उसके बारे में सोचते हैं। लेकिन यह सब ऐसा ही चलता रहा तो वो दिन दूर नहीं जब हम पीने के लिए बूंद-बूंद पानी के लिए मोजताज हो जाएंगे। 

पेयजल आपूर्ति की एक सीमा है

हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि आज दुनिया भर में कई जगहों पर पानी की कमी समस्या एक विकराल समस्या  बनकर उभर रही है। साथ ही हमें यह भी समझना होगा और स्वीकार भी करना होगा कि हम बाह्य उपयोग हेतु पानी का इस्तेमाल किसी न किसी तरीके से तो अवश्य कर लेंगे। लेकिन जीवन जीने के लिए जरुरी पेयजल की आवश्यकता होती है उसकी आपूर्ति कैसे करेंगे क्योंकि उसकी एक सीमा है। 

हम पानी कैसे-कैसे बर्बाद करते हैं

यह समझना होगा की पानी की आपूर्ति अनिश्चितकालीन नहीं है, इसलिए इसके दुरुपयोग करने की भी एक सीमा है। पानी की समस्या के मबल में देखा जाए तो पानी की समस्या के मूल कारण में मानव द्वारा असीमित तरीके से उसका दुरुपयोग करना है। यदि हम अपने रोजमर्रा जिंदगी में पानी का इस्तेमाल व दुरुपयोग दखेंगे तो यह जानकर आश्चर्यचकित हो जाएंगे कि यह सबह कैसे हो रहा है। एक सामान्य उदाहरण से देखें तो एक इंसान दो से तीन बकैट पानी से आराम से स्नान कर सकता है लेकिन वह ऐसा न कर  पांच से सात बकैट पानी का  बेवजह इस्तेमाल करता है। यहीं नही घर के किचन में पड़े गंदे बर्तन भी दो से तीन बकैट पानी में साफ कर सकता है लेकिन नहीं वह पानी का नल खोलकर निरंतर पानी बहने देता है जिससे अनावश्यक पानी बह जाता है। 

बागवानी में अनावश्यक पानी को बहाना

बागवानी के लिए पानी की बर्बादी आम बात है। घंटों तक और नलों को तब तक खुला रखा जाता है जब तक कि पूरा बगीचा पानी का समुद्र न बन जाए। बहुत से लोग इस पानी के ज्यादा बर्बादी से बारे में नहीं सोचते हैं और न ही उन्हें यह महसूस होता है कि क्लोरीनयुक्त पानी बागवानी के लिए बहुत अनुपयुक्त है। थोड़ा अतिरिक्त क्लोरीन जिसे हम कभी-कभी नल के पानी में देखते हैं, दस्त और पेचिश का कारण बनता है। यह आसानी से देखा जा सकता है कि पानी में क्लोरीन की नियमित मात्रा जीवाणुओं और केंचुओं के लिए कितनी घातक है जो पौधों की उचित वृद्धि के लिए बहुत आवश्यक हैं। यह नहीं भूलना चाहिए कि बैक्टीरिया को मारने के उद्देश्य से पानी में क्लोरीन मिलाया जाता है। इसलिए बागवानी के प्रयोजनों के लिए नल के पानी का उपयोग नहीं करने से लोग न केवल इस पानी को बचाएंगे, बल्कि निश्चित रूप से अपने बागानों को बेहतर विकसित करने में मदद करेंगे।

पानी नल खुला है या बंद इसकी बिल्कुल भी फिकर न करना

किसी घर या किसी आफिस या फिर किसी हॉस्टल के बाथ रूम में किसी कारण वश से यदि कोई नल खुला रह जाता है तो टंकी का पानी बेवजह ही खाली हो जाती है और सारा का सारा व्यर्थ चला जाता है। ऐसी स्थिति में दोबारा पानी की टंकी भरनी पड़ती है। जो कि एक अनावश्यक पानी दुरुपयोग का एक बहुत बड़ा उदाहरण है और ऐसा होना बहुत ही आम बात है। अतः इस बात पर विशेष ध्यान देने की जरुरत है कि हमेशा बॉथरुम या कहीं और लगे हुए नल का जब भी इस्तेमाल करें तो एक बार अवश्य चके करें कि वह सहीं से बंद है या नहीं। 

गाड़ी धुलने में बेवजह पानी को बहने देना

गाड़ी धोने के लिए हर दिन पता नहीं कितना पानी बर्बाद होता होगा इसकी कल्पना करना मुश्किल है। लोग गाड़ी धोते समय नल चालूकर पानी बहाते रहते हैं कभी-कभी तो घंटों गाड़ी के उपर पानी बौछार करते हैं बिना किसी फिकर के कि कितना पानी बेवजह जा रहा है। इसमें कमाल की बात यह है कि यह बड़े पैमाने पर हर रोज होता है। अतः हमें चाहिए कि गाड़ी को सीधे नल के पाली से धोकर बल्कि पानी को बकैट में भरकर सीमित मात्रा से गाड़ी को धाेएं।

पानी के सीमित उपयोग की है आवश्यकता

अब तक शायद यह स्पष्ट हो गया होगा कि अनजाने में हम जितना पानी का उपयोग करते हैं उससे अधिक हम उसका दुरुपयोग करते हैं। हम अपने आगंतुकों को स्नान के प्रयोजनों के लिए सीमित पानी का उपयोग करके अपने पानी की आपूर्ति का संरक्षण कर सकते हैं। निर्माण कार्यों के लिए पीने के पानी के उपयोग पर प्रतिबंध लगाकर भी पानी के दुरुपयोग पर लगाम लगाई जा सकती है।

हर तरह से हम जितना चाहे उतना पानी इस्तेमाल कर सकते हैं और उदारतापूर्वक इसका उपयोग बिना किसी प्रतिबंध के विचार के भी कर सकते हैं, लेकिन जब यह बर्बादी का सवाल होता है तो हम इसके बारे में काफी सख्त होना पड़ेगा। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि पानी की हर बूंद बहुत कीमती है। शायद इसीलिए कहा जाता है कि जल है तो जीवन है। #

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