क्या होता है घरेलू उपचार? आखिर क्या है इसकी उपयोगिता?



शताब्दियों पहले मनुष्य ने मानवीय रोगों के लिए कुछ अनले उपचार खोजना आरंभ किया था। प्रकृति ने विविध प्रकार की औषधियां सुलभ की हैं जो अनेक कुशल आधुनिक उपचारों को परास्क कर सकती है। उदाहरण के लिए साधारण जल प्राथमिक चिकित्सा का तीव्रतम और सर्वाधिक प्रीाावशाली उपय है। अनेक जड़ी बूटियां भी विलक्षण विशेषताओं से युक्त पाई गई हैं, जिन्हें चिकित्सा अनुसंधानकर्ता कभी पूर्णतः नही समझ सके हैं। चिकित्सा विज्ञान आश्चर्यजनक ढंग से प्रगति कर गया है। फिर भी यह प्रकृति से अभी बहुत कुछ सीख सकता हैं तथा इसका यथा शक्ति प्रयास कर रहा है। 

गलगन्थ्रि को कुप्रभाव से बचाता है समुद्र से प्राप्त खनिज 

द्वितीय विश्वयुद्ध से पूर्व हजारो बच्चे अपनी गर्दन पर समुद्री नमक आयोडिन से युक्त कंठी धारण करते थे और यह आशा करते थे कि इसकी गंध द्वारा सर्दी-जुकाम से रक्षा हो सकेगी। आजकल डॉक्टर ऐसे उपायों में विश्वास नहीं रखते हैं। बल्कि कृमिनाशक, औषधियों और टीके आदि से गंभीर रोगो का प्रतिरोध करना पसंद करते हैं। फिर भी वे समुद्री नमक की उपयोगिता को स्वीकार अवश्य करते हैं। अनेक खाद्य पदार्थाे, विशेषकर समुद्र से प्राप्त होने वाले लवण रूपी खनिज गलगन्थ्रि को कुप्रभाव से बचाते हैं।

वजन बढ़ाने में काफी कारगर है खजूर 

प्रकृति का सर्वाधिक विशिष्ट और रहस्यमय रसायन खाद्यान्न में काम करता है। कुछ प्रकार के खाद्यान पदार्थाें में रंग से संरक्षण की असाध्याारण शक्ति होती है। यह लवण एक प्रभावकारी प्रलेप (पुल्सी) का काम करता है। कुनकुने पानी में थोड़ा सा नमक मिलाने पर वह विकारग्रस्त आंखों की मरमत कर सकता है। वातरोग से ग्रस्त होने पर इससे स्नान करने पर कभी-कभी आंगों और जोड़ों आदि को राहत मिल सकती है। गंधक शीरा और सोड़े के क्षार का टाॅनिक कभी-कभी बच्चों को बलवृद्धि के लिए दिया जाता है तथा उपचार प्रक्रिया को तेज करने के उद्देश्य से सुअर की चर्बी को कभी-कभी घाव पर लगाई जाती है। चीलू लौहे के स्त्रोत के रूप में तत्काल जिगर के पीछे पहुंचा जाता है, फूलगोभी संक्रमण को रोकने में समर्थ है तथा बंद गोभी नाक और गले के रोगों से रक्षा करती है। खजूर में उच्च खनिज तत्व विद्यमान है तथा जो लोग वजन बढ़ाने के इच्छुक हैं उनके लिए ये पर्याप्त मूल्यवान है।

जलन के घावों को शांत करने में सहायक है शीतल जल 

शायद सर्वाधिक मूल्यवान प्राथमिक चिकित्सा जल ही है। शीतल जल में जलन के घावों को शांत करने की क्षमता होती है। शीतल जल में खरोंच का शमन करने की क्षमता भी होती है। जल सूजन घटाने तथा रक्त संचार बढ़ाने में भी सहायक है। डॉक्टरों के मतानुसार साधारण नमकीन पानी के कुछ घूंट शीत का 50 प्रतिशत प्रभाव कम करने में समर्थ हैं। गठिया वात रोगों के पीड़ितों का कहना है कि कलाई पर तांबे का कड़ा धारण करने से दर्द में काफी आराम मिलता है। कभी-कभी तो इसका पूर्ण निवारण हो जाता है। हृदृय की शल्य चिकित्सा में प्रयुक्त नवीनतम उपकरण तथा जटिल मास्तिष्क शल्य चिकित्सा में भी अब स्वच्छ शीतल जल का प्रयोग किया जाता है। 

कान दर्द में काफी प्रभावशाली है नारियल व लहसून

चम्मच भर शुद्ध नारियल के तेल में थोड़ा सा लहसुन उबाल लेने पर यह सर्दी से हुए साधारण कान दर्द में प्रभावकारी होता है। इस चम्मच को तब तक आग पर रखो जब तक कि लहसुन पककर लाल रंग का  न हो जाए। तब आग हटाकर लहसुन को निचोड़ दे ताकि इसका रस तेल में अच्छी तरह मिल जाए। इसे कुछ ठंडा होन दें। उंगली से छूकर देख लें कि यह बिल्कुल ठण्डा न हो गया हो और तब इसे दर्दवाले कान में डाल दें। कान को धीरे से हिला दें ताकि तेल फैलकर कान के काफी अन्दर चला जाए। फिर इसे रूई से बंद कर दें। ऐसा प्रातकाल और सांयकाल दिन में दो बार करें जब तक कि पूरी तरह से आराम न मिल जाए।

बाल फिर से उगाने में काफी सहायक है प्याज 

कच्चे प्याज सलाद में मिलाकर हर दिन में दो बार खाने से सामान्य शीत के कारण बंद नाक खुलने में सहायता मिलेगी तथा दमा, नजला वश्वास रोग के पीड़ितों को भी राहत मिलेगी। जिन लोगों के बात कम हो अथवा गंभीर बीमारी के कारण झड़ने लगे हों, उन्हें ऐास आहार लेना ग्रहण करना चाहिए जिनमें प्याज का खूब उपयोग किया गया हो। और यदि ये प्याज कच्चे हों तो और भी अच्छा है। इससे न केवल बाल फिर उगने लगेंगे, वरन अपनी मूल आभा व चमक भी फिर प्राप्त कर लेंगे।

त्वचा पर रगड़ या खरोंच हो जाने पर काफी कारगर है शहद 

प्रत्येक भोजन के समय दो चम्मच शहद लेने से अनेक प्रकार के सिर दर्द का उपचार हो सकता है। यदि सिरके में एक चममच शहद मिलाकर धीरे-धीरे पीलिया जाए तो गले के विकार दूर हो सकते हैं। त्वचा पर रगड़ या खरोंच हो जाने पर उसके उपचार के लिए शहद का अत्यंत सफल उपयोग किया जा सकता है। इसका लेप करने से पीड़ा दूर हो जाती है तथा छाले भी नहीं पड़ते। यह जलन वाले क्षेत्र का तीव्रता से शमन कर देती है।

खांसी के इलाज के लिए सर्वोत्तम है नींबू का शरबत

एक नींबू को निचोड़कर उसका रस साधारण गिलास में डाल दीजिए इसमें दो चम्मच ग्लिसरीन भी मिला दीजिए, ग्लिसरीन और नींबू के रस को अच्छी तरह घोल लीजिए और तब इस गिलास को शहद से भर लीजिए। इस प्रकार आपके पास खांसी के इलाज के लिए सर्वोत्तम शरबत तैयार हो जाएगा, जिसका आवश्यकतानुसार मात्रा में उपयोग किया जा सकता है। बालक और वयस्क इसे समान रूप् से ग्रहण कर सकते हैं। जब अन्य सभी औषधियां असफल हा जाएं तब यह कारगर सिद्ध होगी।

त्वचा रोगों  में काफी लाभकारी है आम के पत्तों की राख 

आग पर सिके हुए आमों से तैयार कि गया स्वादिष्ट पेय मीठा पर नमकीन लू के प्रभाव से बचाता है, जलते हुए आम के पत्तों का धुंध हिचकी तथा गले के शून्य अनेक विकारों के शमन के लिए उपयोगी माना जाता है। दमा और संग्रहनी से पीड़ित लोगों को आम की गुठली खिलाई जाती है, खूनी पेचिश के घरेलू उपचार के लिए आम के जले हुए पत्तों की राख का उपयोग प्र्याप्त प्रभावकारी होता है। आम के पत्तों का दूधिया रस पैर फटने पर लगाया जा सकता है। शुष्क आम मंजरी के चूर्ण का मच्छरों को भगाने के लिए उपयोग किया जाता है। इस फल के पकने पर उस पर जो लचकदार रस निकल आता है, यदि उसे नींबे के रस में मिला दिया जाए तो खुजली एवं त्वचा के अन्य रोगों  के शमन के लिए यह लाभकरी प्रमाणित हो सकता है।

 जूं की रोकथाम में सहायक है सिरका और शहद

सिरका और शुद्ध शहद को एक और तीन के अनूुपात में मिलाकर उसका सेवन करने से गले काी जलन या खांसी शांत हो सकती है। यदि आप हर भोजन के बाद एक गिलास पानी में दो चम्मच सेव का सिरका डालकर पियें तो इससे आपकी पाचन प्रक्रिया में सुधार होगा तथा शारीरिक स्वास्थ्य में वृद्धि होगी जूं डिम्भ या अंडे, जो बालों से मजबूती से जकड़े रहते हैं तथा आसानी से नहीं हटते हों, वे सिर के में शीर्घ नष्ट हो जाते हैं और फिर कंघा करें पर बाहर निकल आते हैं।

शीत पर काबू पाया जा सकता है हल्दी से 

सभी देशों के लोग डॉक्टर की पूर्व अनुमति प्राप्त कि बिना अनेक प्रकार के घरेलू उपचारों का प्रयोग करते रहते हैं। इनका उपयोग विभिन्न देशों में अलग-अलग सीमा तक होता हहै। ये गृह उपचार प्रायः समान प्राकर की शिकायतों पर लागू होतें हैं। तथा इनका संक्षिप्त समय में ही निवारण हो जाता है। बच्चों मे ठंड खांसी, उदरशूल, उल्टी, ज्वर, ऐंठन और कब्ज आदि केछ समान्य शिकायतें हैं, जिनके निवारण गृह उपचारों को प्रयोग किया जाता है। इनमें से कतिपय उपचारों का उल्लेख यहां प्रासंगिक होगा। सिर पर दूध से तर कपड़ा रखने, सिर पर प्याज का रस मलने अथवा पुदिने के पत्तों का अर्क पिलाने से ज्वर की तीव्रता घटाई जा सकती है। हल्दी के काटे हुए किसी टुकड़े  से निकली हुई वाज्य सूंघकर अथवा नासिक छिद्र के पास बाम लगाने से से शीत को कुछ नियंत्रित किया जा सकता है। 

 नाभी पर अरण्डी के तेल की कुछ बूंदे भी डालते हैं कुछ लोग

शहद और मूकलिपृस के तेल से युक्त चीनी ग्रह्य करनेें, नमकीन पानी से गरारे करने तथा  बर्फ, ठंडे भोजन और लस्सी, दही और केले आदि से बचकर खांसी का इलाज किया जा सकता है। उदरशूल का उपचार करने के लिए सौंफ का कर्क, जीरा, अदरक की चाम, अरण्डी के तेल  की एक खुराक तथा पेट पर अलसी या मिट्टी का प्रलेप आदि उपायों का प्रयोग किया जा सकता है। कुछ लोग नाभी पर अरण्डी के तेल की कुछ बूंदे भी डाल देते हैं। कुछ लोग पेट पर साबुन के छिलके भी मल देते हैं। कुछ बच्चों को पेट फूलने की शिकायत हो जाती है। उन्हें पहने अरण्डी के तेल की खुराक दी जाती है, फिर अदरक  की चाय दी जाती है तथा गर्म तेल से सिक्त पत्तों एवं हींग के लेपन का प्रयोग किया जाता है। कुछ लोग तारपीन की मालिश करते है। तथा कुछ ब्रांडी भी ग्रहण करते हैं।

कब्ज के इलाज के लिए लाभदायक है अरंडी 

कब्ज के इलाज के लिए अरंडी के तेल की खुराक कई बार ली जाती तथा पिसी हुई हरदड, जड़ी, मुन्नके का अक्र तथा शुष्क अंजीर भी ग्रहण की जाती है। रोग में गुदा मार्ग से साबुन के टुकड़े और वस्त्र वर्तिका आदि के प्रवेश के उपाय भी काम में लाए जाते हैं। यदि कोई शिशु बहुत अधिक चिड़चिड़ा होता या लगातार रोता रहे तो संग्रहणी का इलाज प्रायः अरण्डी के तेल की एक ही खुराक से हो जाता है और उसके बाद अनेक निरोधक औषधियों का उपयोग किया जाता है। बेल फल, अनार का रस, अनार का छिलका, लहसुन, लौंग, कत्था, अफीम और चूना आदि का उपयोग भी किया जाता है। शिशु को इस दौरान केवल अनाज का पानी या केवल हल्का दूध दिया जाता है।

छोटे शिशुओं की भौंहों पर प्रायः काजल का लेप लगाया जाता है ताकि उस पर कोई बुरा प्रभाव न पड़े। शिक्षा के प्रचार- प्रसार के बाद पुरानी औषधियों का स्थान अब नई औषधियों ने ले लिया है। अनेक प्रकार की पीड़ा एवं ज्वर निवारक औषिधियों का विभिन्न रूपों में हर घर में उपयोग होने लगा है। जिसमें डॉक्टर से पूछने की आवश्यक्ता भी नहीं समझी जाती है। साधारण गृह उपचारों को केवल यह समझ करके अवहेलना नहीं करनी चाहिए कि यह सब केवल घरेलू इलाज मात्र हैं। ये उपचार अभी तक मानव समाज में सुसज्जित और प्रचलित रहे हैं क्योंकि ये हमेशा से अपनी उपयोगिकता सिद्ध करते आए हैं। #


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