जानिए कैसे फैलता है स्वाइन फ्लू? स्वाइन फ्लू से बचाव के तरीके?


स्वाइन फ्लू के लेकर हमारे मन में कुछ सवाल होते हैं वे कुछ इसतरह से हैं :

  • स्वाइन फ्लू कैसे होता है?
  • स्वाइन फ्लू कौन सी बीमारी है?
  • स्वाइन फ्लू कितने दिन में होता है?
  • स्वाइन फ्लू वायरस का क्या नाम है
  • स्वाइन फ्लू क्या होता है?
  • स्वाइन फ्लू कैसे फैलता है?
  • स्वाइन फ्लू वैक्सीन क्या है?
  • स्वाइन फ्लू के लक्षण क्या-क्या होते हैं
  • स्वाइन फ्लू के उपचार कैसे होता है?

स्वाइन फ्लू सूअरों में होने वाला सांस संबंधी एक अत्यंत संक्रामक रोग है

दरअसल स्वाइन फ्लू सूअरों में होने वाला सांस संबंधी एक अत्यंत संक्रामक रोग है जो कई स्वाइन इंफ्लुएंजा वायरसों में से एक से फैलता है। आमतौर पर यह बीमारी सूअरों में ही होती है लेकिन कई बार सूअर के सीधे संपर्क में आने पर यह मनुष्य में भी फैल जाती है।

स्वाइन फ्लू पीडि़त व्यक्ति के छींकने, खांसने, हाथ मिलाने और गले मिलने से फैलता है

स्वाइन फ्लू एक प्रकार का संक्रामक रोग है जो मुख्य रूप से दो तरह से फैलता है। पहला, रोगी को छूने, हाथ-मिलाने या सीधे संपर्क में आने से। दूसरा, रोगी की सांस के जरिए जिसे ड्रॉफ्लेट इंफेक्शन भी कहा जाता है। यह वाइरस पीडि़त व्यक्ति के छींकने, खांसने, हाथ मिलाने और गले मिलने से फैलते हैं। वहीं स्वाइन फ्लू का वाइरस स्टील प्लास्टिक में 24 से 48 घंटों तक, कपड़ों में 8 से 12 घंटों तक, टिशू पेपर में 15 मिनट तक और हाथों में 30 मिनट तक सक्रिय रहता है। 

स्वाइन फ्लू हवा के द्वारा या किसी के छूने से दूसरे व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर जाता है

जब आप खांसते या छींकते हैं तो हवा में या जमीन पर या जिस भी सतह पर थूक या मुंह और नाक से निकले द्रव कण गिरते हैं, वह वायरस की चपेट में आ जाता है। यह कण हवा के द्वारा या किसी के छूने से दूसरे व्यक्ति के शरीर में मुंह या नाक के जरिए प्रवेश कर जाते हैं। मसलन, दरवाजे, फोन, की-बोर्ड या रिमोट कंट्रोल के जरिए भी यह वायरस फैल सकते हैं, अगर इन चीजों का इस्तेमाल किसी संक्रमित व्यक्ति ने किया हो।

60 साल की उम्र से ज्यादा लोगों को स्वाइन फ्लू का खतरा सबसे ज्यादा रहता है

छह माह से अधिक आयु के बच्चों, 60 साल की उम्र से ज्यादा के बुजुर्गो, लिवर, किडनी, दमा व एचआईवी पीडि़तों को स्वाइन फ्लू का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। ऐसे लोग जो प्रभावित व्यक्ति के संपर्क में ज्यादा आते हैं जैसे यात्री, डॉक्टर, नर्स और परिजनों उनको स्वाइन फ्लू की आशंका बनी रहती है।

स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए मास्क का सहारा लेना एक फायदेमंद बचाव का तरीका है

आमतौर पर धूल-मिट्टी से बचाव के लिए मास्क बेहतर उपाय होता है। डॉक्टर खुद भी कीटाणुओं से बचने के लिए मास्क का प्रयोग करते हैं। यदि स्वाइन फ्लू जैसी किसी संक्रमित महामारी से बचना हो तो भी मास्क का उपयोग किया जाता है।  जिसके बचाव के लिए अलग-अलग उपाय किए जा रहे हैं। वहीं स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए मास्क का सहारा लेना भी एक फायदेमंद बचाव का तरीका है। आइए जानें स्वाइन फ्लू से बचाव में मास्क कितना लाभप्रद है।

  • फ्लू के मरीजों या संदिग्ध लोगों के संपर्क में आने वाले लोगों को भी मास्क पहनने की सलाह दी जाती है।
  • भीड-भाड़ वाली जगहों मसलन, सिनेमा हॉल या बाजार आदि में जाने से पहले सावधानी के तौर पर मास्क पहना जा सकता है।
  • मरीजों की देखभाल करने वाले डॉक्टर, नर्स और हॉस्पिटल के बाकी स्टाफ व रोगी के परिजनों को मास्क का इस्तेमाल करना चाहिये।
  • वातानुकूलित ट्रेनों या बसों में यात्रा करने वाले लोगों को ऐहतियात के तौर पर मास्क पहनना चाहिए। #

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