कैसे रखें गर्मियों में अपने सेहत का ख्याल? जानिए कुछ आसान टिप्स...


एक अवांछित और अनियंत्रित अतिथि की तरह ग्रीष्म ऋतु आपके द्वार पर जाती है। भारत देश के बहुत से पर्वतीय स्थलों में से किसी एक में पहुंचकर आप कुछ समय के लिए उससे बच सकते हैं। पर कब तक? आखिर, आपकों उसका सामना करना ही होगा। इसलिए अच्छा यही है कि उसका सामना करने के लिए आप अभी से तैयार हो जाएं।

चहचहाते पक्षी और शीतल मंद हवा के झोंके आपके जीवन में शक्ति का संचार करते हैं

शेक्सपियर ने अपने एक अमर नाटक में कहा है, ‘‘अच्छा या बुरा कुछ नहीं है, सोचना ही उसे वैसा बना देता है।’’ ग्रीष्म ऋतु के प्रति अपनी प्रतिक्रिया में भी इस सिद्धांत को प्रयोग में क्यों न लाया जाए? ‘‘ग्रीष्म’’ इस शब्द से ही आपके मन में गर्मी, पसीने, फ्लू, धूल और लू की एक तस्वीर उभरती है। पर साफ बात यह है कि यह तस्वीर एकतरफा है। यह मत भूलिए कि ग्रीष्म रसीले फलों और तारों से जगमग रातों की भी ऋतु है। सुबह बहुत सवेरे, जब पक्षी चहचहाते होते हेैं और शीतल मंद हवा के झोंके आप में जीवन और शक्ति का संचार करते हैं, तो अपने प्रिय बंधुओं के साथ या अकेले ही सैर करना वस्तुतः बड़ा आनंददायक लगता है।

भोजन के प्रति अधिक सतर्कता बरतनी चाहिए

ग्रीष्म का सफलतापूर्वक सामना करने में पहली नीति यह होनी चाहिए कि आप उसके प्रति अपने रूख को बदलें। यदि आपने ऐसा कर लिया तो समझ लीजिए कि आधी लड़ाई तो जीत ली गई है। ग्रीष्म में पाचन-शक्ति थोड़ी कम हो जाती है। इसलिए अपने भोजन के प्रति हमें अधिक सतर्क रहना चाहिए। हम कुछ ऐसे सुझाव देते हैं जो आपके सारे परिवार के लिए उपयोगी रहेंगे। सुबह चाय या कॉफी की बजाय एक गिलास छाछ पीजिए। चाय और कॉफी यद्यपि बहुत ही लोकप्रिय पेय हैं और सारे साल इनका चलन रहता है, पर ग्रीष्म के लिए ये बहुत गर्म हैं। छाछ पाचन शक्ति को बढ़ाती है और उससे सारे दिन शरीर भीतर से शीतल रहता है। यदि संभव हो तो, बीच-बीच में छाछ की जगह फलों का रस पीना चाहिए। इसका लाभ आपको तुरन्त अनुभव होगा।

फलों के जूस, खीरा, ककड़ी, टमाटर भोजन का अभिन्न अंग होने चाहिए

दोपहर के भोजन में सलाद और हरी सब्जियां जरूर होनी चाहिए। खीरा, ककड़ी, टमाटर भोजन का अभिन्न अंग होने चाहिए। गर्मियों में खरबूजे और तरबूज खूब होते हैं। उनके उपयोग से पसीने के रूप में निकलने वाले शरीर के जल की कमी पूरी हो जाती है। शाम का भोजन काफी हल्का होना चाहिए। मिर्च मसालों, सिरके और निशास्ते वाले भोजन से बचना चाहिए। यह बात स्मरण रखनी चाहिए कि जो खाद्य पदार्थ गर्मी में सड़ जाते हैं, उनके गर्म रहने में भी उसी तरह सड़ने की संभावना रहती है। अन्न प्रणाली में भोजन का सड़ना गर्मियों में बहुत से रोगों का कारण बन जाता है। गर्मियों में लू न लगे, इसके लिए आयुर्वेद चिकित्सक विशेष रूप से प्याज के उपयोग की सलाह देते हैं। बच्चे आम से तैयार किया गया गुडम्बर ओर पुदीना भी बड़ा लाभदायक रहता है। गर्मियों में पानी पीना चाहिए।

शरीर को हमेशा स्वच्छ व ठंडा बनाए रखना चाहिए

इसके बाद शरीर की ठीक से सफाई का सवाल आता है। बाल्टी के पानी में यदि संतरे के छिलके निचोड़ दिए जाए या फिर एक चाय का चम्मच भर यू-डी--कोलोन डाल दिया जाए तो उस पानी से स्नान करने से शरीर की दुर्गंध नष्ट होती है और ताजगी बनी रहती है। यू-डी-कोलोन कपड़ों पर भी छिड़का जा सकता है। जिन साबुनों में हैक्साक्लोरोफेन होता है वे दुर्गंध पैदा करने वाले किटाणुओं को नष्ट करते हैं। दुर्गंधनाशी कुछ टैलकम पाउडर भी यही काम करते हैं। पैरों में यदि बहुत पसीना आता हो तो हो तो उन्हें सोडा बाइकार्बोनेट मिले पानी से खूब धोना चाहिए। पांव यदि सूज गए हैं या बहुत थके हुए हैं तो पानी की एक चिलमची में थोड़ा पुदीने का सत डालकर उसमें पैर डुबाने चाहिए और फिर उन्हें ऊनी कपड़े से दबाना चाहिए।

केशों को धोने से पहले यदि बालों की जड़ों में ताजे नींबू के रस की मालिश की जाए

मेक-अप हल्के से हल्का होना चाहिए रात में उसे अवश्य हटा दें, जिससे कि त्वचा अपना सामान्य कार्य कर सके। एक श्रंगाार विशेषज्ञ ने बताया है कि गर्मियों में बालों के जूड़े को ऊपर की ओर बांधना चाहिए। उसे फूलों और गहनों से सजाया जा सकता है। उसे ऐसी पिनों से भी सजाया जा सकता है जिनकी घुडियां सीसे या कांच की बनी होती हें।  केशों को धोने से पहले यदि बालों की जड़ों में ताजे नींबू के रस की मालिश की जाए तो उससे बालों को शक्ति मिलती है। जिस पानी में चावल भिगोए गए हैं उससे यदि बाल धोए जाएं तो बालों को तो लाभ पहुंचता ही है, साथ ही सिर भी ठंडा रहता है।

 सूती साडि़यां शरीर को ठंडा रखती है

गर्मियों में जॉर्जेट या नाइलोन की बजाय सूती साडि़या पहननी चाहिए। सूती साडि़यां घर में धोई जा सकती है और शरीर को ठंडा रखती है। तीसरे पहर के लिए हल्के रंग के वस्त्र काम में लाने चाहिए और भड़कीले रंग केवल रात में इस्तेमाल करने चाहिए। जूतों और सैंडिलो बजाय चप्पलें पहननी चाहिए। #

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