ब्लैक होल्स क्या होते हैं? जानिए क्या है इसका विज्ञान...




प्रकृति और ब्रम्हाण्ड के ऐसे अनेक तथ्य तथा रहस्य हैं जिन्हें मनुष्य आज तक जान नहीं पाया है। प्रकृति के व्यापक साम्राज्य में जो भी घटनाएं घटती हैं वे सकारण होती हैं। उनके पीछे सुनिश्चित लक्ष्य होते हैं। मनुष्य अपनी चैतन्य शक्ति का मात्र सात प्रतिशत भाग प्रयोग में लाता है। शेष 93 प्रतिशत निरर्थक एवं व्यर्थ की चिन्तनों में नष्ट कर देता है। सुप्रसिद्व नोबेल पुरस्कार प्राप्त वैज्ञानिक एलेक्सिस कैरेल ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक - ‘मेन दी अननोन’ में इस बात का संकेत किया है कि प्रकृति का व्यापक विस्तार अपने आप में अद्भुत रहस्य छिपाये हुए है। एलेक्सिस कैरेल की यह मान्यता है कि यदि मनुष्य अपनी शत-प्रतिशत मानसिक और आत्मिक शक्तियों को जागृत कर ले तो इस प्रकृति और ब्रह्माण्ड में घटित होने वाली सभी घटनाओं के रहस्यों को जान लेने में सक्षम हो जायेगा, यहॉं तक की पदार्थ जगत के पीछे जो अस्तित्व कार्य कर रहा है, उसकी भी कुंजी उसके हाथ लग सकती है। लेखक ने इस बात का भी संकेत किया है कि भौतिक जगत परमाणुओं का योग है, जो वस्तुतः सापेक्षता के सिद्वांत से जुड़ा हुआ है।

जलयान, वायुयान और अनेक शक्तिशाली नौकाएं गायब हो चुकी हैं

तत्वदर्शी मनीषियों का भी कथन है कि प्रकृति में होने वाली घटनाएं इसलिए घटित होती हैं कि मनुष्य उनके सूक्ष्म कारणों का पता लगाये और यह जाने कि ऐसा क्यों होता है? ‘बरमूडा ट्रैंगिल’ अंध महासागर का वह त्रिकोणात्मक गहरे पानी वाला भाग है, जहां अब तक सैकड़ों जलयान, वायुयान और अनेक शक्तिशाली नौकाएं गायब हो चुकी हैं। कई खोजी दलों का भी आज तक पता नहीं चल सका है, जो गायब नौकाओं और जहाजों का पता लगाने गये थे। ऐसा क्यों होता है कि उस क्षेत्र में जो चीजें आती हैं, अचानक गायब हो जाती हैं। भौतिक विदों तथा अन्य चोटी के वैज्ञानिकों के लिए ‘बरमूडा ट्रैंगिल’’ एक भारी चुनौती है। यह बात आज तक समझ में नहीं आ सकी है कि उस क्षेत्र में आते ही वस्तुएं कैसे और कहॉ गायब हो जाती हैं। 

अचानक गायब हो जाने का यह भी एक रहस्य है

कुछ वैज्ञानिकों ने ‘‘बरमूडा ट्रैंगिल’’ का मनोयोग के साथ अध्ययन किया है। उनका कहना है कि ‘‘बरमूड़ा ट्रैगिल’’ प्रचंडतम भूचुम्बकीय तथा गुरूत्वाकर्षण शक्ति का केन्द्र बिन्दु है। कई वैज्ञानिक इसे ‘ब्लैक होल’ की संज्ञा देते हैं। उनकी मान्यता है कि ‘‘बरमूडा ट्रैंगिल’’ वह प्रचण्डतम भूचुम्बकीय क्षेत्र है जो कई अन्य बहुत दूरी के ग्रहों से सीधा सम्बंध बनाये हुए है। जब कभी जलयान या वायुयान इस क्षेत्र में आते हैं यहॉं की प्रचण्डतम गुरूत्वाकर्षण शक्ति उन्हें उठाकर किसी अदृश्य लोक में फेंक देती है। शायद अचानक गायब हो जाने का यह भी एक रहस्य है।

भूचुम्बकीय शक्ति ही ‘‘ब्लैक होल’’ के रूप में परिवर्तित हो जाती है

कभी-कभार धरती पर प्रचण्डतम गुरूत्वाकर्षण क्षेत्र पैदा हो जाता है। वह स्थायी होता है और अस्थायी भी। इस बात की विशेष संभावना है कि भूचुम्बकीय शक्ति ही ‘‘ब्लैक होल’’ के रूप में परिवर्तित हो जाती है। जब ब्लैक होल निर्मित होता है तो उसमें प्रचण्डतम गुरूत्वाकर्षण शक्ति पैदा हो जाती है। यही शक्ति ब्लैक होल के दायरे में अदृश्य रूप से अव्यस्थित हो जाती है। इस ब्लैक होल के दायरे में इतनी अधिक आकर्षण शक्ति होती है कि उसके भीतर वस्तुएं गायब हो जाती हैं, जिसका पता लगाना अभी तक संभव नहीं हो पाया है।

बरमूडा ट्रैंगिल भी उनमें से एक है जो सबसे शक्तिशाली गुरूत्वाकर्षण शक्ति का केन्द्र एवं आधार है

सुप्रसिद्व अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वैज्ञानिक ईवान सेण्डरसन ने काफी गहराई से ‘बरमूडा ट्रैंगिल और ब्लैक होल से सम्बन्धित बातों का अध्ययन करने के बाद यह निष्कर्ष निकाला है कि हमारी धरती पर कोई बारह ब्लैक होल्स हैं। बरमूडा ट्रैंगिल भी उनमें से एक है जो सबसे शक्तिशाली गुरूत्वाकर्षण शक्ति का केन्द्र एवं आधार है। सेण्डरसन का कथन है कि इस प्रकार के ब्लैक होल्स विषुवत रेखा के अधिक निकट पाये जाते हैं। भूचुम्बकीय शक्ति की अत्याधिक तीव्रता के कारण इन क्षेत्रों में जलयान और वायुयान अचानक गायब हो जाते हैं। इस प्रकार के स्थानों को वैज्ञानिक ‘डेविल्स ग्रेवयार्ड’ कहते हैं।

‘ब्लैक होल्स’ अस्थायी तौर पर भी निर्मित हो जाते हैं 

जिन स्थानों पर ब्लैक होल्स की स्थितियॉ निर्मित हो जाती हैं, वहॉं पर मानव द्वारा निर्मित विद्युत षक्ति कार्य नहीं करती। ‘ब्लैक होल’ के दायरे में उड़ान भरने वाले हवाई जहाज का संतुलन अचानक ठपप पड़ जाता है। परिणामस्वरूप यंत्र काम करना बंद कर देता है। जलयानों की भी यही स्थिति होती है और देखते-देखते कहॉं गायब हो जाते हैं, कुछ पता नहीं चलता। ईवान सेण्डरसन का विचार है कि अंध महासागर में स्थित बरमूडा ट्रैंगिल सबसे शक्तिशाली एवं प्रचंडतम ब्लैक होल है। यह निरन्तर सक्रिय बना रहता है। शेष अन्य ‘‘ब्लैक होल्स’’ इतने सक्रिय नहीं हैं। हॉ इतना अवश्य है कि यदि कोई उनके प्रभावित क्षेत्र में पड़ जाय तो वह अचानक गायब हो जायेगा। भारत एवं चीन के बीच के सीमावर्ती पहाड़ी क्षेत्रों में एक ब्लैक होल सागर की अतल गहराइयों में है। कभी-कभी ‘ब्लैक होल्स’ अस्थायी तौर पर भी निर्मित हो जाते हैं और कुछ समय तक अपना अस्तित्व बनाये रखने के बाद फिर अनन्त अस्तित्व में विलुप्त हो जाते हैं। इनके निर्मित होने का कारण खोज एवं अनुसंधान के विषय हैं। वैसे अभी तक पता नहीं चल सका है कि ब्लैक होल्स क्यों निर्मित होते हैं।

“ब्लैक होल’’ में  वस्तुएं अचानक से गायब हो जाती हैं

प्रकृति के कार्य करने के अपने अनोखे ढंग हैं। ब्लैक होल भी प्रकृति का सबसे अधिक अचंम्भित करने वाला उदाहरण है। प्रकृति अपने चमत्कारों के माध्यम से किसी गहरे रहस्य की ओर इंगित करती है ताकि मनुष्य इसका अध्ययन करें और जाने कि ऐसा क्यों होता है। ‘‘ब्लैक होल’’ में जो वस्तुएं अचानक गायब हो जाती हैं, वे निश्चित ही कहीं अन्यत्र भेज दी जाती हैं। प्रकृति के इन अद्भुत कार्यो के पीछे क्या है, इसका गहराई से अनुसंधान होना चाहिए। आधुनिक वैज्ञानिकों के लिए यह महान चुनौती है।

अभी भी ब्रम्हाण्ड के कई रहस्यों से पर्दा उठाना बांकी है

हम प्रकृति के बहुत कम रहस्यों को समझ पाये हैं और अभी भी बहुत कुछ समझना बाकी है। ब्लैक होल्स बेहद चौकाने वाले चमत्कारों में गिने जाते हैं। अतः इस क्षेत्र में अत्यधिक लगन, धैर्य एवं वैज्ञानिक समझ की आवश्यकता है। निश्चित ही ब्लैक होल्स किसी अज्ञात प्रक्रिया के प्रतिफल हैं। खगोल वैज्ञानिकों का यह भी विचार है कि जब हाइड्रोजन की मात्रा जलकर समाप्त हो जाती है तो ऐसे तारों में बहुत अधिक संकुचन होता है। परिमाणस्वरूप ब्लैक होल्स के लिए धरती जैसे कई ग्रहों पर प्रचंडतम भूचुम्बकीय शक्ति निर्मित हो जाती है। अंतरिक्ष में ऐसे बहुत से ब्लैक होल्स विद्यमान है। उनके बारे में अभी ठीक से अध्ययन नहीं हो पाया है। इस बात की व्यापक संभावना है कि ये ब्लैक होल्स दो ग्रहों या कई तारासमूहों को जोड़ने वाली कड़ी के रूप में कार्य करते हैं। यदि वैज्ञानिक इसकी सच्चाइयों की खोजबीन कर सकें, तो यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी। #

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